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वह बच्‍ची पत्रकारिता का ककहरा सीखने आयी। बेशर्मों, तुमने उसे पिटवा दिया ?

: गोंडा के मनकापुर बाजार में नवोदित महिला पत्रकार को होटलवालों ने पीट डाला :  आठ महीना पहले ही सरोज मौर्या पर पत्रकार बनने का भूत सवार हुआ : अब तो गोंडा समेत आसपास जिलों के पत्रकारों का जिम्‍मा है कि वे सरोज को न्‍याय दिलायें :

कुमार सौवीर

लखनऊ : पत्रकारिता उसका पैशन बनता जा रहा था। अराजकताओं को उजागर करना और उसे दुरूस्‍त करने में उसको आनंद मिलता था। खबरों के समंदर में नयी-नयी खबरों को खोजना, तर्क-वितर्क करना और फिर उसे संवारने-सजाने का काम उसे आकर्षक लगता था। बहुत छोटी जगह नुमा कस्‍बे में रहती है यह बच्‍ची, लेकिन उसके हौसले बेहिसाब। लेकिन पत्रकारिता जगत के बड़े मगरमच्‍छों ने उसे अपना निवाला बना डाला। खबर है कि यहां के कुछ पत्रकारों ने उस बच्‍ची की सरेआम-दिनदहाड़े पिटाई की, और जितनी भी हो सकती थीं, गालियां दीं।

पुलिस। आप पुलिस की बात कर रहे हैं। जी हां, पुलिस भी है वहां। लेकिन इस जोशीली बच्‍ची की तनिक भी सुनवाई नहीं हो पायी है अब तक। शिकायत तो कप्‍तान तक से कर चुकी है यह बच्‍ची। लेकिन मुकदमा अभी तक दर्ज नहीं हो पाया है।

जिला गोंडा, और शहर मनकापुर। यह मामला है उस शहर का, जहां के राजभवन में रहने वाली महिलाओं को सन-90 तक राजभवन से बाहर निकलते नहीं देखा था। लेकिन उसके बाद अयोध्‍या-काण्‍ड शुरू हो गया। राजनीति की नब्‍ज महसूस करने में यहां के राजा आनंद सिंह ने जनता को समेटने के लिए अपनी पत्‍नी को राजमहल से बाहर निकलने की इजाजत दी। रानी ने सिर से पल्‍लू हटाया और रामभक्‍तों की सेवा में जुट गयीं। साथ ही साथ अगले चुनाव में उन्‍होंने अपने पति के लिए अपने आंचल को फैला कर वोटों के लिए भीख भी मांगी। जीत गयी आनंद सिंह।

लेकिन अपने घर की दहलीज से बाहर निकलने का साहस कर जीत को अपने खाते में जोड़ने की कोशिश करने वाली हर महिला की किस्‍मत आनंद सिंह की पत्‍नी जैसी नहीं रही। क्‍योंकि वह राजमहल की नहीं, बल्कि एक गरीब परिवार की थी।

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जी हां, हम आपको बता रहे हैं सरोज मौर्या की कहानी। गोंडा के लालबहादुर शास्‍त्री स्‍नातकोत्‍तर महाविद्यालय में मनोविज्ञान विषय से एमए के प्रथम वर्ष में पढ़ती है। करीब आठ महीना पहले इस बच्‍ची को पत्रकारिता का भूत चढ़ा था। एक यूट्यूब चैनल से वह जुड़ गयी थी सरोज मौर्या।

कल सुबह सरोज को पता चला कि शहर के मंगल भवन चौराहा के पास बने एक रेस्‍टोरेंट में मिलावटी खोया और पनीर खपाया जाता है। बस, पहुंच गयी सरोज। लेकिन जैसे ही उसने होटल वाले से पूछतांछ शुरू की, होटल वाले और उसके साथियों ने उसे भद्दी गालियां देते हुए बाल पकड़ कर उसे जमीन पर गिराया, होटल से घसीटते हुए सड़क पर ला पटका और उसके बाद लातों-घूंसों की बारिश कर दी। वहां से भाग कर सरोज कोतवाली पहुंची, लेकिन वहां उसका मजाक बनाया गया। एसपी से मिल कर शिकायत की गयी, लेकिन उन्‍होंने भी कोई कार्रवाई नहीं की।

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पत्रकार पत्रकारिता

उधर घटना के समय दौरान वहां से गुजर रहे एक स्‍थानीय पत्रकार ने बताया कि होटल के पास भीड़ देख कर जब वे मौके पर पहुंचे, तो पाया कि सरोज नामक लड़की भीड़ को भद्दी-भद्दी गालियां दे रही थी। इस पत्रकार का कहना है कि सरोज इस पूरे क्षेत्र में दबंग की तरह व्‍यवहार कर रही है। बताते हैं कि उस समय सरोज मौर्या किसी सड़कछाप मवाली की तरह व्‍यवहार कर रही थी।

हो सकता है कि इस पत्रकार की बात पूरी तरह सच ही हो। लेकिन सवाल तो इस बात पर है, कि क्‍या हम सरेआम किसी होटल के बाहर किसी बच्‍ची को दिनदहाड़े होने वाली पिटाई को सहन कर सकते हैं। अगर नहीं, तो फिर अब तो गोंडा और आसपास के जिलों के पत्रकारों की समवेत जिम्‍मेदारी है कि वे इस बच्‍ची के साथ एकजुट हों।

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