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बाप रे बाप। डरता हूं, न जाने कब किसको फंसा दे यह महिला

: सोनभद्र में धड़ल्‍ले से भ्रूण-हत्‍या का कारोबार, ठेंगे पर बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ कार्यक्रम : कैसे बेटियाँ बचेंगी जब भ्रूण हत्यारों को संरक्षण मिलता रहेगा : विरोध हुआ तो टीवी चैनल  पत्रकार को बलात्कार आदि गंभीर धाराओं में मुकदमा ठोंक दिया :

गजेन्द्र गुप्ता

सोनभद्र : एक तरफ सरकार लाखों रूपया खर्च करके बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ कार्यक्रम चला रही है, और दूसरी तरफ सफेदपोश नेताओं और विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से भ्रूण हत्या का अस्पताल चलाया जा रहा है। आखिर सरकार का यह कैसा कार्यक्रम है? क्या ऐसे बेटियाँ बचेंगी? एक तरफ मुखालिफत हो और दूसरी तरफ यह अवैध कारोबार चले।

जी हाँ सोनभद्र जनपद में ऐसे दुकानों की भरमार है। झोलाछाप डाक्टर व अवैध अस्पताल जोरों से संचालित हो रहें हैं। लोगों की मजबूरी है कि इन्हीं झोलाछाप डाक्टर और बिना लाइंसेसी अस्पताल में अपना ईलाज कराना पड़ता है क्योंकि दूसरा कोई रास्ता नहीं है। लेकिन ताज्जुब तो हमारे होनहार विभागीय अधिकारीयों पर होता है जो इस तरह के गैर लाइसेंसी डाक्टरों और अस्पताल को चलने देतें हैं। नेता तो बिन पेंदी के लोटा होते हैं लेकिन अधिकारी तो शिक्षित होतें हैं। खैर जो भी हो सरकार भी ऐसे गैर लाइसेंसी डाक्टरों और अस्पतालों पर अंकुश लगाने में नाकाम हो गयी है और अगर कोई इसके लिए आवाज उठाता भी है तो उसे पूरी ताकत के साथ दबाने की कोशिश की जाती है और कानून भी इसमें पूरा सहयोग करता है।

ताजा घटना सोनभद्र की भी है, जहाँ तहसील के बगल में अवैध अस्पताल चल रहा था और उसमें भ्रूण हत्या का भी कारोबार हो रहा था। मगर किसी की हिम्मत नहीं हुई थी कि उस अस्पताल और उसके संचालक के खिलाफ आवाज उठा सके। बड़ी हिम्मत जुटाते हुए ग्रामीण महिला ने इसके खिलाफ आवाज उठाया। कई शिकायतों के बाद छापेमारी हुई, कई आपत्तिजनक बिना लाइसेंस की मशीने मिलीं। लेकिन अस्पताल संचालिका की हिम्मत देखिए कि गलती स्वीकारने के बजाए उस महिला को धमकाने निकल पड़ीं। इस बीच अस्पताल संचालिका ने पुरानी रंजिश मे टीवी चैनल के पत्रकार को लपेटे में ले लिया और उस पर ब्लैकमेलिंग और बलात्कार जैसे गंभीर धाराओं में मुकदमा ठोक दिया।

बताया जाता है कि पत्रकार और अस्पताल संचालिका का पैसे का पुराना विवाद था और दोनों के बीच विवाद बढ़ गया था और इस बीच पत्रकार ने अस्पताल से जुड़ी खबरों को चैनल में प्रकाशित किया और मौका देखकर अस्पताल पर हुई कार्यवाही को दबाने के लिए ये मुकदमा ठोक दिया। वह तो गनीमत है कि हाईकोर्ट ने इस मामले में फंसाये गये पत्रकार विष्‍णु गुप्‍ता के खिलाफ दर्ज करायी गयी रिपोर्ट को ही खारिज कर उन्‍हें पुलिस चंगुल से बचा लिया, वरना अब तक वह जेल में ही बंद होता।

अब इस मुकदमे से पत्रकारों और समाजसेवीयों में भय व्याप्त है कि ऐसे किसी विवादित मामले में हाथ न डाला जाए जिसमे महिला शामिल है। न जाने कौन सी धाराओं में फंसा दे।

( गजेंद्र गुप्‍त सोनभद्र से पत्रकार हैं। यह लेख इसी रिपोर्टर की ईमेल से आया है। )

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