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आर्मी में नौकरी दिलाने के नाम पर उगाही, विधायक पर मामला दर्ज

: सोनभद्र के दुद्धी से अपना दल से विधायक हैं हरीराम चेरो : झारखण्‍ड के मेदिनीनगर के टाउन हॉल थाने में दर्ज हुआ मामला : गोवंश और जंगली लकड़ी की तस्‍करी में भी खूब नाम कमा चुके हैं चेरो :

मेरी बिटिया डॉट कॉम संवाददाता

सोनभद्र : सरकारी खेमे से विधायक हरीराम चेरो पर फिर एक नयी मुसीबत आ पड़ी है। ताजा मामला है आर्मी में नौकरी दिलाने में भारी धोखाबाजी, रिश्‍वतखोरी और मामला दबाने की साजिश का। झारखण्‍ड की पुलिस ने इस विधायक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। सूत्र बताते हैं कि इस बेईमानी की इस हद तक पहुंची थी, कि चेरो ने अपनी यह अवैध उगाही रकम को सीधे अपने बैंक अकाउंट में ही जमा करा लिया। बहरहाल, खबर है कि किसी भी समय झारखण्‍ड की पुलिस हरीराम चेरो से पूछतांछ करने के लिए उत्‍तर प्रदेश आ सकती है।

सूत्रों के अनुसार इसी महीने झारखण्ड के मेदिनीनगर (डाल्टनगंज) के टाउन हॉल थाने में एक नया मुकदमा दर्ज हुआ है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि अपना दल के विधायक हरीराम चेरो ने मई 2016 में भारी रकम उगाह कर बेरोजगार युवाओं को सेना में भर्ती कराने का झांसा दिया था। इसके लिए चेरो ने सेना के एक रिटायर्ड अधिकारी से मिलकर इन्होंने 16 युवाओं को फ़र्ज़ी नियुक्तिपत्र भी थमा दिया था। लेकिन अपना यह नियुक्ति पत्र लेकर जब युवा लोग नासिक के देवलली आर्मी कैम्प गए, तो उन्हें पता चला कि उनके नियुक्तिपत्र फ़र्ज़ी हैं। जाहिर है कि यह खबर मिलते ही इन युवाओं के हाथों से तोते ही उड़ गये। मेदिनीनगर के टाउन हॉल थाने में दर्ज मुकदमे के अनुसार युवाओं ने 16.80 लाख रुपये आरोपी विधायक व उनके बताए गए खातों में ट्रांसफर किया है।

सूत्र बताते हैं कि इस मामले को सेना की अभिसूचना ईकाई ने भी बहुत गम्‍भीरता से लिया है। हालांकि पुलिस ने इस मामले इन बेरोजगार युवाओं की ओर से रिपोर्ट दर्ज करा ली है, लेकिन सेना के सतर्कता अधिकारियों ने इस मामले में अपने अफसरों की मिली-भगत के सूत्र छानने-खंगालने की कोशिशें शुरू कर दी हैं। सेना पता चलाना चाहती है कि आखर वह कौन-कौन अफसर हैं, जो चेरो के साथ मिलजुल कर इस तरह की धोखाधडी कर रहे थे। यह भी जांच का विषय है कि यह मामला पिछले कितने समय से इस तरह का संचालित होता रहा है।

आपको बता दें कि सोनभद्र के दुद्धी विधान सभा से निर्वाचित विधायक हरि राम चेरो का विवादों से पुराना नाता रहा है। दो बार दुद्धी ब्लॉक के गड़दरवा गांव के प्रधान रह चुके हरिराम चेरो ने प्रधानी के दौरान आस पास के गांवों में जबरदस्त धाक जमाया था। जन चर्चाओं की मानें तो घनघोर जंगलो से घिरे गड़दरवा गांव से इन्होंने कीमती जंगली लकड़ियों का खूब अवैध व्यापार किया, इसके बाद हरिराम चेरो का नाम गोकशी के लिए ले जाये जा रहे गोवंश जानवरों उत्तर प्रदेश से झारखण्ड सीमा पार कराने में भी आता रहा,सूत्र कहते हैं कि गोकशी वाले व्यापारियों को ट्रक झारखण्ड की सीमा में प्रवेश कराने में दिक्कत होती थी,इसलिए पशुओं से भरे ट्रक गड़दरवा के जंगल मे खाली होते थे और यहीं से हरिराम चेरो के लोग पैदल जंगली रास्ते से पशुओं को झारखण्ड की सीमा में प्रवेश कराते थे। बदले में हरिराम चेरो को मोटी रकम व्यापारियों से मिलती थी।

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सोनांचल

दुद्धी विधान सभा से लगातार 7 बार विधायक रह चुके विजय सिंह गौड़ व हरिराम चेरो के बीच छत्तीस का आंकड़ा रहता था, यद्यपि विजय सिंह गौड़ मुलायम सिंह यादव के मुख्यमंत्रित्व काल मे राज्य मंत्री रह चुके थे ,और उनके प्रभाव से दुद्धी कोतवाली में कई छोटे मोटे मुकदमे हरिराम के खिलाफ दर्ज हैं, हरिराम चेरो की कइ बार पुलिसिया पिटाई भी हो चुकी है,हलाकि इसका कोई प्रभाव इन पर नही पड़ा और हरिराम और अधिक चर्चित होते गए,विजय सिंह गौड़ के विरोधी खेमे ने हरिराम को विजय सिंह गौड़ के विकल्प के रूप में जनजाति नेता के रूप में स्थापित करने में मदद किया। सन-15 में हरिराम चेरो जे पी सीमेंट फैक्ट्री डाला से रंगदारी मांगने के आरोप में जेल भी गए ।

सन-17 के विधान सभा चुनाव से पहले तक हरिराम सपा का झंडा ढोते रहे थे,परन्तु ऐन चुनाव के वक्त जब दुद्धी विधान सभा की सीट भाजपा ने अपना दल को दे दिया , हरिराम ने अपना दल जॉइन कर लिया और अपना दल ने भी विजय सिंह गौड़ के खिलाफ चुनाव लड़ाने के लिए हरिराम को ही उपयुक्त मानते हुए, विधायकी का टिकट दे दिया,भाजपा की लहर और विजय सिंह गौड़ के विरोधियों के एकजुटता ने हरिराम को माननीय तो बना दिया, लेकिन विवादों ने उनका पीछा नही छोड़ा।

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