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"दरोगा, सीओ, एसपी की नहीं मारूंगा, तो वो पैसा कैसे हगेंगे ?"

: हजरतगंज चौराहे पर चेकिंग करते पुलिसवालों के साथ शेखी मारते पत्रकारों की संख्या कुछ ज्यादा ही हो गई है : देखिए कि किस तरह अपनी उगाही की डींगें मार रहा है यह पत्रकार : लखनऊ में ऐसे ही पत्रकारों की पौ बारह है, असली पत्रकार तो नेपथ्य में चले गए :

कुमार सौवीर

लखनऊ : क्‍यों दारोगा जी, आज कितना कमाया। कितनों की पे डाली। यह बताओ कि अगर हम लोग दरोगा, सीओ और एसपी की नहीं मारेंगे, तो कौन हमें देगा। जिसके भी पे--- दोगे, वही हचक कर माल हग मारेगा। इसलिए बस पेले रहो, माल मिलता रहेगा। जरा भी चूके, तो लक्ष्‍मी जी नाराज हो जाएंगी। अगर नहीं मारोगे तो कोई दूसरा मार देगा। जरा सोचा तो कि पैसा कैसे निकलेगा। अरे हम पत्रकार हैं, तुम भी कमाओ, हमको भी कमवाओ।

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शातिर पत्रकार

यह भाषावली है इस नए दौर के पत्रकार की। ये अपनी बात कहते-लिखते नहीं हैं। बल्कि उसे गालियों से सराबोर करते हैं। शेखी मारते हैं अपने बड़े पत्रकार होने का और डींगें मारते हैं, कि अमुक विधायक से उसने 5 लाख रुपया ऐंठ लिया था। ताल ठोंक कर बताते हैं कि कि आईबीएन-7 को यह खबर चली, लेकिन मैंने उसे दबा लिया, और एवज में इतना लाखों रुपया मेरी जेब में आ गया।

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पत्रकार पत्रकारिता

अब पहचान लिया आने, या नहीं। जी हां यह नए दौर के पत्रकार हैं।पत्रकारिता के शिष्टाचार, भाषा, अंदाज, लेखन, विचार, व्यवहार और शिष्टता से कोसों दूर। लेकिन हैं पत्रकार। खुद को बड़ा पत्रकार कहलाता है यह। उनकी आजीविका का साधन वेतन या पारिश्रमिक नहीं, बल्कि दूसरों से उगाही करना होता है। इसके लिए वह खुद को पत्रकार के तौर पर प्रतिष्ठापित करते हैं। डींगें और शेखी मारेंगे, जिसमें किसी को भी किसी भी स्तर तक नीचे गिरा जाने की क्षमता दिखाते हैं।जरा सुनिए कि कैसे-कैसे अपना काम करते हैं ऐसे तथाकथित पत्रकार अपराधियों से भी ज्यादा जघन्य अंदाज है।

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बड़ा दारोगा

इन लोगों का यह वीडियो है, जिसे एक दरोगा ने इस पत्रकार नुमा अपराधी बनाया है। बेहद अभद्रता, बदतमीजी और गालियों से कोसों से भी आगे।  उसकी यह पूरी बातचीत इस सब इंस्पेक्टर ने यह वीडियो शूट करने के बाद प्रमुख न्यूज़ पोर्टल मेरी बिटिया डॉट काम को भेजी है। आइये, देखिए और सुनिए इस वीडियो को, जो यह लखनऊ हृदय स्थल हजरतगंज चौराहे पर बने पुलिस बूथ के बाहर बनाया गया है। वीडियो में इस अपराधी पत्रकार ने बेशुमार गालियां दी है, नंगी-नंगी गालियां, अश्लीलता की सीमा पार करती हुईं।  इसमें उस कथित पत्रकार ने कुबूल किया है कि उसने किस-किस लोगों कैसे-कैसे अपने चंगुल में फंसाया और उनसे भारी हो गई थी उगाही की। इस अपराधी पत्रकार की हिम्मत तो देखिए वह ताल ठोंक कर देता है कि अगर दरोगा, सीओ और एसपी की अगर नहीं मारेगा, तो पैसा कैसे निकलेगा।

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शातिर पत्रकार

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