Meri Bitiya

Thursday, Feb 25th

Last update02:57:01 PM GMT

मेरी बिटिया डॉट कॉम अगर आपको पसंद हो, आप इस पोर्टल के लिए सुझाव, समाचार, निर्देश, शिकायत वगैरह भेजने के इच्‍छुक हों तो meribitiyakhabar@gmail.com पर हम आपकी प्रतीक्षा कर रहे है.

Advertisement

ऐसे-वैसे पत्रकार: कलम में बड़ी ताकत होती है, उसका दुरूपयोग जघन्‍य अपराध

: किसी के खिलाफ लिखने का मसाला है, तो खुद लिखो न। दूसरों को अस्‍त्र क्‍यों बनाते हो : खलीलाबाद के शख्‍स ने मेरे सवालों पर जवाब लिखा कि बेबाक कलमकार कुमार सौवीर को पहली बार इतनी पड़ताल करते देखा : अपने साथी के खिलाफ तैयार खबर दूसरे के नाम से छपवाना चाहते थे अजय श्रीवास्‍तव :

कुमार सौवीर

लखनऊ : अभिव्‍यक्ति एक बड़ा अस्‍त्र होता है। लेकिन ऐसे बड़े अस्‍त्र को हासिल करना, उसे सम्‍भालना, उसके लिए बारूद भरना, उसे दागने की प्रक्रिया समझना, उसे दागने की औकात और तमीज हासिल करना, उसके झटके को बर्दाश्‍त करने की सलाहियत रखना, और फिर उससे निकले गुबार-गर्द-धुंए को सहन करना ही नहीं, बल्कि उसे वापस अलमारी में सुरक्षित रखने की औकात रखना भी एक बड़े साहस और क्षमता की बात होती है।

लेकिन कभी भी अपना अस्‍त्र किसी दूसरे के कंधे पर नहीं दागना चाहिए। लेकिन मैं देखता हूं कि कुछ लोग ही नहीं, बल्कि पत्रकारिता के नाम पर धंधे में जुटे काफी लोग अपनी बात सीधे कहने की हैसियत ही नहीं रखते। जानते हैं कि आखिर क्‍यों। वह इसलिए कि न तो उनकी औकात ऐसी होती है, और न ही उन्‍हें सम्‍भाल पर रख पाना उनके लिए मुमकिन होता है। वह यूं कि वे दिल में कालिख भरे रखते हैं, इसलिए साहस नहीं जुटा पाते हैं और डरते हैं कि अगर किसी को पता चल जाएगा तो क्‍या होगा। इसएि इसी लिए वे लोग अपने कंधे के बजाय दूसरों के कंधों का इस्‍तेमाल करते हैं और उसकी पीठ पर बंदूक तान कर फायर करते हैं। सांप भी मर जाए, और लाठी पर भी कोई खतरा न आये।

ऐसे ही एक शख्‍स है अजय श्रीवास्‍तव। खलीलाबाद में रहते हैं। कभी खुद को पंजाब केसरी का पत्रकार बताते हैं तो कभी किसी चैनल का रिपोर्टर। एक ने खबर दी है कि यह अजय श्रीवास्‍तव जी-समूह के हिन्‍दुस्‍तान चैनल में काम कर रहे हैं। लेकिन इसके साथ ही साथ उन्‍होंने सत्‍यमेव जयते नाम का एक वाट्सऐप ग्रुप भी बना रखा है, जिसमें वे समाचारों का आदान-प्रदान करते रहते हैं। इसी नाम से अजय ने एक डॉट कॉम भी शुरू किया है। लेकिन इस ग्रुप में किसी दारोगा-सीओ के तबादले पर जाने या आने की विदाई अथवा पलक-पांवड़े बिछा कर स्‍वागत करने की ही सूचनाएं होती हैं।

खैर, इन्हीं अजय श्रीवास्‍तव ने अभी कुछ ही दिन पहले वाट्सऐप पर एक खबर भेजी। दिक्‍कत यह है कि मैं अजय की भेजी खबर का स्‍क्रीन-शॉट नहीं ले पाया। क्‍योंकि तब तक मेरा फोन ही टूट गया था। लेकिन उसके पहले ही मैं उस को कॉपी कर चुका था, ताकि उस पर खबर लिख देता। आप चाहें तो, उसे निहार लीजिए।

पत्रकारिता से जुड़ी खबरों को देखने के लिए निम्‍न लिंक पर क्लिक कीजिए:-

पत्रकार पत्रकारिता

"पत्रकार से पेशेवर आरटीआई दलाल बने उमेश भट्ट का असली ठिकाना जेल की काल कोठरी।

शैलेश सिंह राजन की रिपोर्ट

संतकबीरनगर- खलीलाबाद ब्लाक की महिला बीडीओ तारा देवी के साथ मारपीट और उनसे रंगदारी मांगने के साथ उनका चरित्र हनन एवं सरकारी अभिलेखों को दफ्तर में फाड़ने के आरोप में निरुद्ध शहर कोतवाली क्षेत्र के धवरिया गाँव के रहने वाले आरोपी शख्स उमेश भट्ट की पहचान कभी अपनी एक निडर पत्रकार के रूप में होती थी, वर्ष 2005 के करीब टीवी चैनल जनमत न्यूज़ से अपनी पत्रकारिता की शुरुवात करने वाला आरोपी शख्स उमेश भट्ट राष्ट्रीय समाचार चैनल P7 से वर्ष 2012 तक जुड़ा रहा, इस दौरान उसने कई भ्रष्टाचारियों के चेहरों को भी बेनकाब किया लेकिन यह शक्श अब पत्रकार नही रहा,  अब वो एक पेशेवर आरटीआई दलाल के रूप में संतकबीरनगर जिले और गैर जिलो में प्रसिद्घ हो चुका है ।

भ्रष्टाचार को उजागर करने में सबसे मददगार कानून आरटीआई का मजाक उड़ाते हुए आरोपी उमेश भट्ट द्वारा ना जाने कितने विद्यालय प्रबन्धको, सरकारी अध्यापको, पुलिस कर्मियों , ग्राम प्रधानों और ग्राम पंचायत अधिकारियों के अलावा जिले में तैनात अन्य अफसरों से आरटीआई के बदले मोटी रकम वसूल किये जाने की चर्चाएं भी सुनने को मिलती रही है, | ये आरोपी इतना शातिर किस्म का है जिस किसी ने भी इसकी मदद की पहले वो उसी पर अपना निशाना साधते हुए अपना उल्लू सीधा करना चाहा, कभी पथरी बीमारी से दर्द झेल रहे आरोपी उमेश भट्ट को धवरिया गाँव के प्रधान सर्वेश भट्ट के भाई अभिलाष भट्ट ने तीस हजार रुपये की माली मदद की उसी मददगार ग्राम प्रधान के द्वारा कराए गए विकास कार्यो का लेखा जोखा आरटीआई के जरिये माँग कर उनसे भी अवैध धनउगाही करने की कोशिश की।

खलीलाबाद से जुड़ी खबर को पढ़ने के लिए निम्‍न लिंक पर क्लिक कीजिए:-

संतकबीर नगर

आरटीआई के जरिये धनउगाही के उड़ते चर्चो को उस वक्त और बल मिला जब उसने बगैर किसी मजबूत आर्थिक स्रोत के ही लाखो की लागत लगा कर अपना खुद का भवन निर्माण भी कराना शुरू कर दिया, सूत्रों के मुताबिक मकान निर्माण के दौरान धन की कमी को पूर्ण करने के लिए वो बीडीओ खलीलाबाद से भी सूचना के बदले रंगदारी की रकम चाहता था जिसको न देने पर महिला बीडीओ के चरित्र का हनन करते हुए मर्यादाओं की सीमा को भी लांघ गया, ब्लाक परिसर में घटना के वक्त मौजूद लोगो ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि आरोपी उमेश भट्ट कई दिनों से बीडीओ तारा देवी से धनउगाही के प्रयास में जुटा था, बीडीओ द्वारा साफ इंकार किये जाने पर भड़के आरोपी उमेश भट्ट ने उनके साथ मारपीट करते हुए आफिस में रखे महत्वपूर्ण कागजातों को फाड़ डाला ,आरटीआई के बदले आदतन धनउगाही करने वाले आरोपी उमेश भट्ट के कारनामे यही नही थमते, सूत्रों के मुताबिक आरोपी उमेश भट्ट ने एक निजी चैनल के पत्रकार के ऊपर आईटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कराकर उससे भी 50,000(पचास हजार रुपये) की डिमांड प्रिंट मीडिया के एक पत्रकार के माध्यम से कराया था, इस मामले में भी चैनल के पत्रकार द्वारा लिखित तहरीर कोतवाली में दी जाने वाली ही थी कि वो खुद जाकर बीडीओ खलीलाबाद से उलझ गया और जा पहुंचा सलाखों के पीछे ।

आरोपी उमेश भट्ट को जब आरटीआई एक्ट की लत लगी कि उसने पत्रकारिता जैसे पवित्र पेशे को छोड़कर इसका इस्तेमाल धनउगाही के रूप में करने लगा, इसके पूर्व में वो एक शिक्षक से जब अवैध धन की मांग जन सूचना अधिकार अधिनियम से न मांगने के एवज में कर रहा था तब उसकी पिटाई भी सुनने को मिली थी, जिसके सम्बन्ध में कोतवाली में पीड़ित शिक्षक ने शिकायत भी दर्ज कराई थी लेकिन बाद में आरोपी उमेश भट्ट द्वारा छमा याचना मांगने पर मामला रफा दफा हो गया था,आरटीआई एक्टविष्ट बन कर ग्राम प्रधानों के अलावा कई विभागीय अधिकारियों व कर्मचारियों से सूचना न मांगने के बदले धन उगाही करने के चर्चो में हमेशा रहने वाले आरोपी उमेश भट्ट के काले कारनामो की एक लंबी फेहरिस्त है जिसको गिनाया नही जा सकता है, आरोपी उमेश भट्ट के खिलाफ अब तक न जाने कितने मामले शहर कोतवाली में दर्ज है जिसपर कोर्ट में मामला लंबित चल रहा है, गैस एजेंसी मालिक को आरटीआई से प्रताड़ित कर उसको ब्लैकमेल करने के मामले में सुर्खियां बटोर चुके आरोपी उमेश भट्ट के खिलाफ कोतवाली में लूट, दलित उत्पीड़न जैसे गम्भीर मामलों में मुकदमा दर्ज है । आरोपी उमेश भट्ट की मुश्किलों में एक और इजाफा जब हुआ तब उसने लखनऊ के किसी परिचित से पुलिस के उच्चाधिकारियों को फोन कराकर मामले को रफा दफा करने की पूरी कोशिश की लेकिन इस बार उसका यह प्रयास सफल नही हुआ जिसके चलते आज वो सलांखो के पीछे जा पहुँचा है ।।"

(क्रमश:)

जी हां, यह किस्‍सा खलीलाबाद का है, जहां दलाल पत्रकारों ने अपने ही उस साथी को जेल भेजने की साजिशों का तानाबाना बुना, और फिर उनके खिलाफ दुष्‍प्रचार का अभियान भी छेड़ दिया। उमेश भट्ट नाम का यह पत्रकार ऐसे ही साजिशों के चलते इस वक्‍त संतकबीर नगर के जिला कारागार में बंद है। लेकिन उसे जेल भेजने पर उसके ही पत्रकारों ने जम कर अभियान छेड़ा और मिठाइयां भी खायीं-बांटीं। यह जानते हुए भी कि उमेश भट्ट की पहचान एक जुझारू और प्रतिबद्ध पत्रकार के तौर पर है।

आप के आसपास भी ऐसे ही कथित दलाल लोगों और उमेश भट्ट जैसे जुझारू पत्रकारों की कहानियां मौजूद होंगीं। आइये, ऐसे दलालों को बेनकाब किया जाए, और उमेश भट्ट जैसों को न्‍याय दिलाने के लिए कदम उठाया जाए। आइये, प्रमुख न्‍यूज पोर्टल मेरीबिटियाडॉटकॉम की इस मुहिम में हाथ बंटाइये, हाथ बढ़ाइये।

इस खबर की अगली कड़ी को पढ़ने के लिए कृपया निम्‍न लिंक पर क्लिक कीजिएगा:-

जुझारू-पत्रकार


Comments (0)Add Comment

Write comment

busy