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संवादसूत्रों की मां, बहन, बेटी तक तौल देते हैं हिन्‍दुस्‍तान के प्रबंधक-संपादक

: देवरिया में हिंदुस्तान के क्राइम रिपोर्टर को बर्खास्त कर दिया गोरखपुर एडीशन के सम्‍पादक ने : दो-कौड़ी की नौकरी देकर क्‍या सीओ पुलिस बनवाना चाहते हैं हिन्‍दुस्‍तान अखबार वाले : अपने संवादसूत्रों को अश्‍लील गालियां देने की कोशिश अगर तत्‍काल नहीं रूकी, तो सरेआम पीटे जाएंगे सम्‍पादक-प्रबंधक :

कुमार सौवीर

लखनऊ : देवरिया में हिंदुस्तान अखबार के रिपोर्टर राजन सिंह की बर्खास्तगी में एक नया एंगल सामने आया है। खबर है कि अखबार के संपादक और प्रबंधक ने मिलकर इस मामले पर बहुत बड़ा खेल करने की कोशिश की थी, लेकिन जब दलाली वाली बात फाइनल नहीं हो पाई तो पूरा ठीकरा क्राइम रिपोर्टर के माथे पर फोड़ दिया गया। इतना ही नहीं, अपने संवादसूत्रों को महज दो-चार हजार रूपल्‍ली महीना दे कर बात-बात पर मां-बहन की गालियां देने का एक नया रिवाज हिन्‍दुस्‍तान अखबार में फैलना शुरू हो गया है। कुछ भी हो, देवरिया के पत्रकार इस मामले पर बेहद आक्रोशित और क्षुब्द भी है।

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देवारण्‍य

आपको बता दें करीब 20 दिन पहले यहां की बिहार और यूपी की संयुक्‍त बाजार सोहनपुर में शराब का धंधा बेहिसाब है। वजह यह कि इस बाजार का आधा हिस्‍सा बिहार में है, जहां शराबबंदी लागू है। वजह यही है कि इस बाजार के यूपी वाले हिस्‍से में शराब का धंधा दिन-रात चलता है। यहीं के एक धंधेबाज हैं रामनरायण तिवारी। एक दिन उन्‍होंने एक दलित को पीटा, जातिसूचक गालियां दीं। मामला पुलिस में गया, तो सीओ को जांच सौंपी गयी।

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कहानी यहीं से शुरू हुई। हिंदुस्तान के मेरठ स्थित एचआरडी मैनेजर प्रभाकर यानी पीएन तिवारी के परिवार के लोग यहीं सोहनपुर के रहने वाले हैं और शराब के धंधे में हैं। पीएन तिवारी रामनरायण तिवारी के सगे छोटे भाई हैं।  मुद्दा अवैध शराब की खरीद-फरोख्त का है जिसमें रोजाना 50,000 रुपयों का वारा न्यारा होता है। रामनरायण तिवारी पर हरिजन एक्ट पर मुकदमा दायर होने के बाद पुलिस का दबाव बढ़ा, तो रामनारायण तिवारी और उनके परिवारों के लोगों के हाथों के तोते उड़ गए। मामले को निपटाने के लिए एचआरडी मैनेजर पी एन तिवारी ने देवरिया मैं अपने अखबार के क्राइम रिपोर्टर राजन सिंह को पूरी बात बताई और 40 हजार रूपया देकर पूरा मामला निपटाने का दबाव बनाया।

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पत्रकार पत्रकारिता

देवरिया के पत्रकारों का कहना है कि राजन सिंह ने सीओ से कह कर तिवारी को दलित एक्ट में छुड़ाने की पूरी कोशिश की। लेकिन विलंब होता देख पीएन तिवारी और राम नारायण तिवारी हत्‍थे  से उखड़ गए और राजन सिंह को फोन पर मां बहन और बेटी की गंदी गालियां देना शुरू कर दिया। राजन ने जब उसका प्रतिरोध किया तो पीएन तिवारी ने यह मामला गोरखपुर के स्थानीय संपादक आशीष त्रिपाठी तक पहुंचा जिन्होंने आव देखा न ताव सीधे राजन को बर्खास्त कर दिया।

सूत्र बताते हैं कि संपादक ने इस मामले में एक बार भी राजन सिंह से नहीं पूछने की जरूरत नहीं समझी कि यह पूरा मामला क्या था और उसका इस मामले में पक्ष क्या है। हिंदुस्तान गोरखपुर में कार्यरत एक पत्रकार ने प्रमुख न्यूज़ पोर्टल मेरी बिटिया डॉट काम को बताया कि आशीष त्रिपाठी इस मामले में बिल्कुल फिसड्डी-फट्टू साबित हुए। बताते हैं कि एडमिनिस्ट्रेशन से जुड़े किसी भी आदमी का फोन आने पर उनका हाथ कांपने लगता है, वे थरथरा पड़ते हैं। एडमिनिस्ट्रेशन के लोगों को संपादकीय से जुड़े लोग अपना खुदा मानते हैं।

बहरहाल, देवरिया के पत्रकारों में इस पूरे मामले को लेकर बेहद आक्रोश है और वे हिंदुस्तान संपादक के इस फैसले से क्षुब्ध्‍ा है।

लेकिन हैरत की बात है कि जब प्रमुख न्यूज पोर्टल www.meribitiya.com के संवाददाता ने जब देवरिया हिंदुस्तान के ब्यूरो चीफ वाचस्पति मिश्र से इस बारे में बातचीत करने की कोशिश की तो उन्होंने किसी भी सवाल का कोई भी जवाब देने से साफ इनकार कर दिया। काफी कोशिशों के बावजूद गोरखपुर एडीशन के स्‍थानीय सम्‍पादक आशीष त्रिपाठी से भी बात नहीं हो पायी। (क्रमश:)

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