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पत्रकारों की खोपड़ी फोड़ डाली, अब इश्‍क के ठहाके लगा रहा देवरिया का कप्‍तान

: शुक्रवार को ही मतगणना स्‍थल पर तीन पत्रकारों का सिर फोड़ा था देवरिया पुलिस ने : पत्रकारों को बुरी तरह घायल करने वाला एसपी राकेश शंकर देर रात पत्रकारों को अपना शैतानी अट्टहास सुनाने में मशगूल रहा : वकीलों ने भी इस हादसे पर अपना आक्रोश व्‍यक्‍त जताया, आंदोलन की तैयारी शुरू :

कुमार सौवीर एवं गौरव कुशवाहा

देवरिया : निकाय चुनाव की मतगणना के दौरान प्रेस के लिए प्रशासन द्वारा बनाये गये प्रेस-बूथ पर जिस तरह पुलिस ने बबर्र लाठीचार्ज कर तीन पत्रकारों का सिर फोड़ दिया था, उस पर जिला प्रशासक को भले ही कोई दुख या क्षोभ हो, लेकिन यहां के पुलिस कप्‍तान राकेश शंकर इस हादसे पर बाकायदा जश्‍न मना रहे हैं। पत्रकारों की पिटाई की खुशी उनकी शेर-शायरी में झलक रही है, जो बीती रात से उनके विभिन्‍न वाट्सऐप समूहों में गूंजता दिख रहा है। कहने की जरूरत नहीं कि कप्‍तान की इस मस्‍ती जिले के पत्रकारों पर खूब नागवार हुई है। हालांकि इस मामले पर अधिवक्‍ताओं ने भी अपना आक्रोश व्‍यक्‍त किया है। वहां इस मसले पर अपनी रणनीति बनाने की भी बात चल रही है। जबकि विभिन्‍न दल के लोग इस पिटाई पर हर्ष भी व्‍यक्‍त कर रहे हैं, कि यह पत्रकार दलाल हैं और इस लिए उन पर हुआ व्‍यक्‍त आक्रोश जायज है।

देवरिया में पत्रकारों पर बर्बर लाठीचार्ज कराने वाली पुलिस के वर्तमान पुलिस अधीक्षक राकेश शंकर से जुड़ी खबरों को देखने के लिए निम्‍न लिंक पर क्लिक कीजिए:-

राकेश शंकर

कल यानी शुक्रवार का दिन था, जब पत्रकारों को अकारण ही पुलिस की टुकड़ी ने पत्रकारों को बुरी तरह घायल कर दिया था। इसमें चंद्र प्रकाश पाठक समेत तीन पत्रकार घायल हुए थे। पांडेय के सिर में तो आठ टांके भी लगे थे। यह लाठीचार्ज सिटी सीओ और कोतवाल ने कराया था। मौके पर पत्रकारों को चुन-चुन कर पुलिस ने जमकर पीटा था, और उन्‍हें भागने का मौका तक नहीं दिया गया।

बताते हैं कि इस कार्रवाई से गोमैम्‍बो खुश हो गया। और इसी जश्‍न में कल रात एसपी राकेश शंकर के अंदर का मिर्ज़ा ग़ालिब जाग गया और एक से एक शायरियां और गज़ले न्यूज़ ग्रुप में एसपी साहब द्वारा सुनाया गया। मसलन,

सलीका इतना अदब का, तो बरकरार रहे, रंजिशें अपनी बदल जगह हों, सलाम अपनी जगह।

ढूंढ लेना अंदेरों में मंजिल अपनी, जुगनू कभी रौशनी के मोहताज नहीं होते।

ऐसा नहीं कि कायम न होगा दुबारा, जो टूटा हुआ ऐतबार समझते हैं मुझे

नींद से मेरा ताल्‍लुक ही नहीं बरसों से, ख्‍वाब आ-आ के मेरी छत पे टहलने क्‍यों है

आईपीएस अफसरों से जुड़ी खबरों को देखने के लिए क्लिक कीजिए:-

बड़ा दारोगा

लेकिन हैरत की बात है कि इस मामले में सीओ और कोतवाल को क्‍लीन चिट थमायी, और पत्रकारों को मलहम तक नहीं लगाया गया। इस कांड पर देवरिया में जमकर चुटीले किस्‍से बह रहे हैं। टीएसआई रामवृक्ष यादव नीरो है जो बासुरी बजाते है और एसपी राकेश शंकर मिर्ज़ा ग़ालिब रात में शायरियां सुनाते है। दिन में पत्रकारों पर लाठीचार्ज की घटना और रात में एसपी द्वारा न्यूज़ ग्रुप में शायरी सुनाना ये पत्रकारिता के जख्मों पर मरहम लगाना तो नही हो सकता।

एस पी साहब ने कविता और शायरी को सोशल मीडिया पर इतना ज्यादा पोस्ट किया है कि इससे अब सबको पता चल गया है कि हमारे एस पी साहब राकेश शंकर जी एक बढ़िया शायर है और अच्छी शायरी करते हैं। लेकिन कल मतगणना स्थल पर हुए पुलिस लाठीचार्ज में घायल हो गए हमारे पत्रकार मित्र चन्द्र प्रकाश पाण्डेय के बारे में कोई शायरी नहीं पोस्ट की।

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पत्रकार पत्रकारिता

प्रश्न यह उठता है कि क्या इस लाठीचार्ज की जिम्मेदारी किसी पुलिस अधिकारी ने ली है? यदि नहीं तो किन लोगों ने किन परिस्थितियों में लाठियों से बर्बतापूर्वक पीटा? क्या इसकी मैजिस्‍ट्रेटी जांच में पीड़ित व्यक्तियों को न्याय मिल पाएगा और वह भी कितने दिनों में? क्यों नहीं जिला प्रशासन वीडियो फुटेज के आधार पर फौरी तौर पर जो पुलिस कर्मी पीट रहे हैं उन्हें निलंबित कर रहा है?हालांकि पुलिस की लाठियां भाजपा के नेताओं और एक अधिवक्ता पर भी गिरी है। लेकिन इन दोनों समुदायों की तरफ़ से किसी हलचल की सूचना नहीं है।

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देवारण्‍य

हो सकता है अधिवक्ताओं द्वारा घटना के विरोध में आज कचहरी में हड़ताल हो जाय और पुराना इतिहास दुहराते हुए अधिवक्ता भाई पुलिस को कचहरी परिसर में दौड़ा दौड़ा कर पीटे। वैसे कल शाम को घटना के बाद दीवानी कचहरी के कुछ बड़े अधिवक्ताओं द्वारा कोई रणनीति बनाई जा रही थी।

पीटीआई के पत्रकार एडवोकेट ओम प्रकाश श्रीवास्तव भी इस मामले में पुलिस के खिलाफ जमकर आग उगल रहे हैं।  दूसरी तरफ सपा के नेताओं द्वारा अक्सर कुछ उलटा ही बोल वचन किया जाता है । जैसे कल शाम को ही कचहरी के पास कुछ बड़े सपा नेता यह कहते हुए जरूर सुने गए कि पत्रकार पीटे गए हैं बड़ा अच्छा हुआ। पत्रकार और मीडिया वाले साले दलाल हो गये है। इनकी पिटाई इसी तरह से होनी चाहिए।समझ में नहीं आ रहा है कि आखिर हम पत्रकारगण पुलिस और नेताओं की नजर में इतना चुभते क्यूं है?फिलहाल यह भी आश्चर्यजनक है कि भाजपा की सरकार है और भाजपाइयों को पुलिस ने विधिवत धोया। लेकिन घटना के बारह घंटे बाद भी दोषियो पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है।

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