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आवारा कुत्‍तों की हत्‍याएं होतीं तो तांडव होता काशी में

: हरियाणा से बैठ कर वाराणसी को लेकर अफवाहें बुन रहे यह नवजात पत्रकार पहले हिमाचल में भी पीटा जा चुका : आश्‍चर्य की बात यह कि ऐसी अफवाहों को शेयर कर अपनी पीठ ठोंकने में जुटे हैं बड़े-बड़े पत्रकार, साहित्‍यकार और नौकरशाह भी : काशी जैसी संस्‍कृति पर कींचड़ फेंकने से पहले हजार बार सोचिए :

कुमार सौवीर

लखनऊ : जरा अफवाह-पसंद लोगों से बचने की कोशिश कीजिए। और इसके लिए जरूरी है कि आप अफवाहबाजों से दूरी बनाये रखिये। वरना आपकी हल्‍की सी चूक भी हमारे पूरे समाज को तहस-नहस कर डालेगी। ताजा मामला है उस अफवाह का, जिसमें काशी के आवारा कुत्‍तों को जहर देकर मारने की साजिश की अफवाह है। इस अफवाह में यह फैलाा गया था कि फ्रांस के राष्‍ट्रपति को वाराणसी की सैर लेकर आने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यात्रा को नरापद करने के लिए प्रशासन ने पूरी सतर्कता की थी, जिसमें एक खास कवायद यह भी थी कि शहर के आवारा कुत्‍तों को जहर देकर उनके रास्‍ते से हटा दिया जाए।

जबकि काशी को जानने-समझने वालों को खूब पता है कि यह ऐसी कोई साजिश की गुंजाइश ही काशी में मुमकिन नहीं है। और अगर कभी हो जाए, तो उसका मुंहतोड़ जवाब देने की कूबत काशी के वासियों में खूब है, पर्याप्‍त है। ऐसे अफवाहबाज लोगों को पता ही नहीं है कि काशी का कण-कण शिव-व्‍यापी है। कुत्‍ता तो खास तौर पर सम्‍मानित है, कारण यह कि कुत्‍ता ही तो काशी का असली कोतवाल है। जी हां, भैरव जी। सच बात तो यह है कि काशी में पूजा-अर्चना करने आये बाहरी लोगों में तो काशी-विश्‍वनाथ के प्रति आस्‍था है। लेकिन काशी वासियों में जितनी भी आस्‍था शिव महादेव के प्रति है, उससे कम भैरव जी के प्रति नहीं है। अब अगर भैरव पर कोई हमला होता है, तो काशी वाले खुद ही उसका प्रतिरोध कर सकते हैं। एक क्षण में ही काशी हाहाकार कर सकती है।

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जिया रजा बनारस

आपको याद होगा कि हिमाचल प्रदेश के चुनाव में एक पत्रकार ने अपने पीटे जा चुके चेहरे की फोटो के साथ एक खबर लगायी थी कि उसे भाजपा के लोगों ने बुरी तरह पीट दिया। उस पत्रकार का दावा था कि वह जेकेटीवी का रिपोर्टर है और चुनाव का कवरेज करने हिमाचल गया था। वहां अचानक उसे फ्री में बंट रही शराब को शूट किया था, और जब उस बारे में वह भाजपा के बड़े नेताओं से मिलने गया तो उसे पीट दिया गया। उसका तर्क ही गले से नीचे उतर रहा था। सवाल यह था कि जहां फ्री में शराब बंट रही थी, वहां विवाद नहीं हुआ, तो फिर बड़े नेताओं के घर ऐसा क्‍यों हो गया। बहरहाल, इस हादसे के एक महीना पहले ही इस पत्रकार को पहली नौकरी मिली थी, और उसके चार महीना पहले ही वह कुरूक्षेत्र विश्‍वविद्यालय से पत्रकारिता की डिग्री लाया था। इस पत्रकार का नाम है सौवर सगवाल। लेकिन उसने हिमाचल की जो अफवाह लिखी, उसे चार हजार से ज्‍यादा लोगों ने शेयर किया।

इसी सौरव सगवाल ने अभी कुछ दिन पहले लिखा:- एक दौरे के लिए अगर कुत्तों को ज़हर देकर मारने वाली घटना सच है, तो जनाब इससे बड़ी निर्दयता कुछ नहीं हो सकती। Gourav Sagwal

इस खबर को यूपी के एक बड़े सेवानिवृत्‍त वरिष्‍ठ आईएएस अफसर ने अपनी वाल पर शेयर किया तो मैं क्षुब्‍ध हो गया। मैंने उस नौकरशाह को जवाब में लिखा:- दुख की बात यह नहीं है कि कोई खबर सच है या नहीं के आधार पर लिख दिया गया। दुख इस बात की है कि यह एक झूठे शख्‍स के बुनी इस अफवाह को आप भी शेयर कर रहे हैं।

हरियाणा में बैठ कर खुद को जेके-टीवी का रिपोर्टर कहलाने वाले इस शख्‍स अभी पिछले मई में ही कुरूक्षेत्र में पत्रकारिता की डिग्री हासिल हुई थी, जैसा कि उसने खुद बताया मुझे। उसके बाद वह पांवटा साहब में शराब के मामले में बुरी तरह पीटा गया। वह शख्‍स कभी भी बनारस तो दूर, यूपी तक नहीं गया। और काशी के मामले में कितनी धाकड़ अंदाज में लिख रहा है, और आप उसे लाइक-शेयर भी कर रहे हैं। खास तौर पर तब जब आप खुद भी पड़ोस के इलाहाबाद में पढ़े-लिखे हैं। ऐसी चीजें लाइक-शेयर करने के पहले आपको अपने दिल पर हाथ रख कर खुद से पूछना चाहिए था कि क्‍या ऐसा हो सकता है कि काशी जैसी धार्मिंक महानगरी के अक्‍खड़ लोगों के सामने ऐसा हो जाए, और वे खामोश रहें।

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पत्रकार

आपको भाजपा से दिक्‍कत है, तो उसका प्रतिरोध कीजिए। आपको नरेंद्र मोदी की कार्यशैली से नफरत है, तो खूब कीजिए। यह सब तो आपकी लोकतांत्रिक अधिकारों की सूची में दर्ज है। जितना भी चाहें, भरसक कीजिए। लेकिन दिक्‍कत तो तब होगी, जब आप किसी संस्‍कार, किसी संस्‍कृति, किसी शहर, किसी आकार, और किसी प्रचीन धार्मिक इमारतनुमा संगठन जैसे महान महानगर पर कींचड़ फेंकेंगे।

विगत दिनों काशी को लेकर यही सब प्रपंच हुआ था।

मेरा विरोध इसी बात पर है। और दुख इस बात है कि आप सब लोग ऐसी अफवाहों को हाथोंहाथ लपकते हैं।

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