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पोतड़ेदार पत्रकारों। आईडी मत खरीदना, धोखा होगा

: पत्रकारिता में भविष्‍य खोजते युवकों को फंसाने को हर जिले में बिछाया गया है दाना-जाला : बेराजगार युवक सहज ही इस गिरोहों के चंगुल में फंस जाते हैं : राजस्‍थान, यूपी उत्‍तराखंड, बिहार, झारखण्ड, दिल्‍ली, एनसीआर, हरियाणा, पंजाब और जम्‍मू-कश्‍मीर में फैला है इसकी टोपी उसके सिर का धंधा :

कुमार सौवीर

लखनऊ : यह खबर उन लोगों के लिए खास तौर पर है, जो पत्रकारिता में सद्यस्‍तनपायी हैं, मतलब नवजात। पहली भूख पर चिल्‍ल-पों शुरू कर देते हैं, और तनिक भर पेट भर जाए, तो बिस्‍तर पर ही चिरक भी कर मारते हैं। इसीलिए ऐसे नवजात शिशुओं को उनकी मांएं पोतड़े बांध देती हैं, जो लंगोटनुमा होता है और घर के घिसे हुए सूती कपड़ों से तैयार किया जाता है। मध्‍यवर्गीय और ऊपर आयवर्ग से जुड़े लोग इसे डायपर कहते-खरीदते-बांधते और बात-बात पर फेंक देते हैं।

तो पता चला है कि ऐसे ही सद्यस्‍तनपायी पत्रकारों की ख्‍वाहिशों को परवान पर चढ़ा कर उन्‍हें लूटने की साजिशें चल रही हैं। चंद लोग हर जिले ही नहीं, बल्कि तहसीलों में भी पत्रकारों की भर्ती की फैक्‍ट्री खोलने पर आमादा हैं। यह लोग स्‍थानीय ठलुआ और लड़हू-जगदरों ही नहीं, बल्कि वाकई पत्रकारिता में समाज में अपनी पहचान प्रमाणित करने के इच्‍छुक लोगों को इसके लिए बड़ा जाल और चारा फेंक रहे हैं। इसके तहत यह लोग विभिन्‍न प्रदेशों में संचालित हो रहे चैनलों की ओर से युवाओं को पत्रकार बनाने का लालच दे रहे हैं। इसके लिए उन्‍हें आईडी कार्ड और माइक-आइडी की दी जा रही है। अगर आप ऐसे किसी धंधे से प्रभावित होकर उसके साथ गोल्‍ड-हैंडशेक कर रहे हैं, तो हम माफी चाहते हैं कि आपने सच की ओर से मुंह ही मोड़ लिया है कि यह धोखाधड़ी नहीं, बल्कि एक साफ-सुथरा धंधा है जिसमें बेहद सम्‍मान, गजब कमाई है, प्रशासनिक अफसरों से करीबी रिश्‍ते हैं, और अनमोल सुरक्षित भविष्‍य के साथ ही साथ जीवन में चहुंओर हरियाली भी है।

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पत्रकार पत्रकारिता

दरअसल, यह फ्रेंचाइजी का धंधा है, जिसे अब अधिकांश न्‍यूज चैनल कर रहे हैं। इसमें शातिर किस्‍म के लोगों को चुनने के बाद ऐसे चैनल उन्‍हें नौकरी देने के बजाय, ठेके पर काम करने का लालच देते हैं। उनका कहना है कि वे मार्केट से कैसे भी चाहें, कर लें। लेकिन चैनल को एक निश्चित रकम समय पर अदा कर दें। उसके बाद आप जो भी चाहें, उस चैनल को जिस तरह भी चाहें, तो बेच लें। इसके लोग यह लोग तय की गयी रकम चैनल के मालिक को अदा कर अपने क्षेत्र या क्षेत्र में उगाही का धंधा शुरू कर देते हैं। यह लोग जिलों में अपनी रंगबाजी जमाने के शौक से पीडि़त लोगों को एक मोटी निश्चित रकम वसूल कर उन लोगों को उस चैनल की माइक-आईडी थमा देते हैं, उसके बाद यह युवक अपने जिले की तहसील, थाना या कस्‍बा इलाका में सहायक रिपोर्टर तैनात करते हैं। प्रक्रिया वही कि जो भी जितनी रकम उगाह सके। हल्‍के पढ़े-लिखे और औसत परिवार के बेराजगार युवक सहज ही इस गिरोहों के चुंगुल में फंस जाते हैं।

कुछ तो चैनल ऐसे हैं जो इस तरह को स्‍थाई रूप से संचालित करते रहते हैं, लेकिन अधिकांश का तो धंधा ही इसकी टोपी उसके सिर की शैली में चलता है। जो जैसा फंसा, उससे उगाहो और निकल लो किसी दूसरे समूह की ओर अपना सूटकेस लेकर। इसके बाद वे किसी दूसरे चैनल में भी यही धंधा करते हैं, और आने वाला नया व्‍यक्ति पुराने लोगों को भी नये तरीके से भारी-भरकम रकम उगाहने शुरू कर देतेा है। अंतहीन, बेहिसाब। (क्रमश:)

यूपी ही नहीं, बल्कि देश के हिन्‍दी भाषा-भाषी क्षेत्रों में इस तरह की धोखाधड़ी इधर कुकुरमुत्‍तों की तरह हैं। राजस्‍थान, यूपी उत्‍तराखंड, बिहार, झारखण्ड, दिल्‍ली, एनसीआर, हरियाणा, पंजाब और जम्‍मू-कश्‍मीर में अपनी जमीन जमाये लोगों और उनके चेनलों ने हजारों प्रतिभाओं की हत्‍या की बेहद खतरनाक साजिश संचालित कर रखी है। इसके संभावित शिकार किसी जंगली खूंख्‍वार जानवर से कम नहीं हैं। हम ऐसे लोगों की करतूतों का खुलासा करने जा रहे हैं। आपको अगर ऐसे लोगों के प्रति कोई भी जानकारी हो तो हम तक भी शेयर कीजिएगा।

यह श्रंखलाबद्ध समाचार है। इसके अगले अंकों को पढ़ने के लिए कृपया निम्‍न लिंक पर क्लिक कीजिएगा:-

कुकुरमुत्‍ते पत्रकारिता के

Comments (1)Add Comment
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written by Adarsh awasthi, May 26, 2018
नवजात पत्रकारो़ पर अच्छी पोस्ट।इससे सबक लेना चाहिए।

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