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विधवा बनाने में हत्यारे डॉक्टर पर 3 लाख का जुर्माना

सोनभद्र के सरकारी सर्जन ने पोत डाली डॉक्टरी पेशा पर कालिख

: चिकित्सा विभाग के आला अफसरों और नेताओं का संरक्षण प्राप्त था डॉ अनिल शर्मा को : हत्यारे डॉक्टर पर हत्या का मुकदमा चलाने की कवायदें शुरू : एक गरीब युवक की धन्वन्तरि बने डॉक्टर ने गीता को बेवा बना डाला : महज चार हजार के लिए कर डाला था अनावश्यक आपरेशन : आखिर सात वर्षों बाद विधवा गीता यादव को मिल गया न्याय : फोरम ने मृत्युव-पूर्व बयान को माना सबूत, पुलिस-प्रशासन बेखबर :

जौनपुर। ऑपरेशन में लापरवाही से पति की मौत के बाद पिछले सात वर्षों से सरकारी चिकित्सक के खिलाफ जंग लड़ रही विधवा को देर से ही सही आखिर न्याय मिल ही गया। उपभोक्ता फोरम न्यायालय ने उक्त चिकित्सक को एक माह के भीतर तीन लाख रुपये मुआवजे के रुप में अदा किए जाने का आदेश पारित कर दिया। इस मामले में फोरम ने मृत व्याक्ति के मृत्यु-पूर्व बयान को पर्याप्ता सुबूत मान लिया, जिसमें स्था नीय पत्रकारों ने वीडियोग्राफी कर डाली थी। बहरहाल, कई जागरूक नागरिकों ने लाले यादव हत्यायकांड में प्रमुख हत्यारे माने गये डॉक्टर पर हत्या का मामला चलाने की कोशिशें करना शुरू कर दिया है।

मामला गौराबादशाहपुर थाना क्षेत्र के प्रेमापुर गांव निवासी लाले यादव की विधवा गीता यादव का है। जिसकी मौत एक सरकारी चिकित्सक द्वारा प्राइवेट प्रैक्टिस के दौरान एक मेडिकल स्टोर के पीछे कमरे में किए गए ऑपरेशन के बाद हुई थी जिसमें लापरवाही साबित होने पर उपभोक्ता फोरम ने यह फैसला दिया है। महिला को न्याय दिलाने में सहारा समय चैनल पर मौत के बाद चलायी गयी खबर की सीडी ने महत्वपूर्ण भूमिका अदा की जिसमें मौत से पूर्व लाले यादव ने घटना की क्रमवार दास्तां सुनाई थी। वर्तमान समय में यह चिकित्सक सोनभद्र के जिला चिकित्सालय में वरिष्ठ सर्जन के तौर पर तैनात है।

मामला सात वर्ष पूर्व का है जब सात जनवरी 206 को सुबह 8 बजे शहीद उमानाथ सिंह जिला चिकित्सालय जौनपुर में लाले यादव अपनी पत्नी के साथ पेट में दर्द का इलाज कराने पहुंचा था इस दौरान अस्पताल में मौजूद दो दलाल उसे बहला—फुसलाकर जीजीआईसी वाली गली में स्थित सुधांशू मेडिकल स्टोर पर ले गये जहां उन्हें बताया गया कि सरकारी अस्पताल में तैनात सर्जन अनिल कुमार शर्मा तुम्हें ठीक कर देंगे। दलालों की मिली भगत से लाले यादव का पास के एक डायग्नोस्टिक सेंटर पर अल्ट्रासाउण्ड कराया गया जिसमें अपेण्डिक्स होने की बात बतायी गयी और तुरंत ऑपरेशन करने को कहा गया जिसके लिए उसे 5 हजार रुपये जमा करने को कहा गया यदि ऑपरेशन नहीं किया गया तो लाले की जान जा सकती है।

यह सुनकर मामला चार हजार में तय हो गया और मेडिकल स्टोर के मालिक द्वारा तुरंत डाक्टर अनिल कुमार शर्मा को बुलाया गया और वहीं अंदर एक कमरे में ले जाकर उसके पेट का ऑपरेशन कर दिया गया। आश्वासन दिया गया कि तुम्हारा पति अब ठीक हो जाएगा 13 जनवरी 206 को लाले यादव के पेट का टांका भी काट दिया गया लेकिन 3—4 दिन बात जहां पर टांका लगा था वहां से मल बाहर आ गया जिसे देखकर लाले की पत्नी घबरा गयी और तुरंत मेडिकल स्टोर पर पहुंची।

मेडिकल स्टोर के मालिक ने बताया कि तुम फौरन वाराणसी के एक प्राइवेट हास्पिटल में इलाज कराने चली जाओ। इस पर डाक्टर ने भी उसे लिखित तौर पर रेफर कर दिया। महंगा हास्पिटल होने के नाते लाले यादव की पत्नी गीता यादव उसे जिला चिकित्सालय में ले गयी जहां उसकी हालत बिगड़ती गयी और 28 जनवरी 206 को उसकी मृत्यु हो गयी। इस दौरान सहारा समय न्यूज चैनल के संवाददाता ने पूरी स्टोरी को अपने कैमरे कैद कर लिया और लाले यादव का मरने से पूर्व बयान भी रिकार्ड कर लिया। मौत के बाद चैनल पर खबर प्रमुखता से चली जिस पर शासन में हड़कम्प मच गया और मामले की जांच शुरु की गयी। इसी दौरान लाले यादव की पत्नी पर डाक्टर अनिल शर्मा ने दबाव बनाया रखा और चंद रुपयों का प्रलोभन देकर मामला खत्म करने को कहा था। विधवा गीता यादव ने जिला प्रशासन और पुलिस के पास भी अनिल शर्मा नामक इस डॉक्टिर पर हत्या मामला दर्ज कराने की अर्जी लगायी थी, लेकिन प्रशासन और पुलिस ने उसकी कोई गुहार सुनी।

आखिरकार लाले यादव की पत्नी ने जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष फोरम में वाद दाखिल किया जिसमें डाक्टर के अलावा प्रमुख सचिव स्वास्थ्य उत्तर प्रदेश, मुख्य चिकित्साधिकारी अधिकारी सोनभद्र, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक सोनभद्र को भी पार्टी बनाया गया। सबसे चौंकाने वाले बात ये थी कि डा अनिल कुमार शर्मा तैनात तो सोनभद्र जिला चिकित्सालय में थे पर वे जौनपुर जिला चिकित्सालय के सामने एक मेडिकल स्टोर पर अपना ऑपरेशन थिएटर बनाकर धड़ल्ले से प्राइवेट ऑपरेशन किया करते थे जहां पर लाले यादव का ऑपरेशन किया गया था।

आखिरकार तमाम सबूतों और गवाहों को देखने के बाद फोरम के अध्यक्ष लाल बहादुर राम व सदस्य डा शशि प्रभा सिंह, नारायण द्विवेदी ने यह पाया किया डा अनिल कुमार शर्मा ने न सिर्फ डाक्टर के पेशे को बदनाम किया बल्कि लापरवाही बरती जिसके चलते लाले यादव की मौत हो गयी। इस मामले पर उन्होंने फैसला सुनाते हुए डा$ अनिल कुमार शर्मा को तीन लाख रुपये मुआवजा स्व लाले यादव की पत्नी गीता यादव को एक माह के भीतर देने का आदेश पारित किया तथ अन्य लोगों के विरुद्ध कोई भी दोष नहीं पाया गया जिसके चलते उन्हें बरी कर दिया गया। वर्तमान समय में डा$ अनिल कुमार शर्मा सोनभद्र जिला चिकित्सालय में ही तैनात है और आदेश की प्रति जिला चिकित्सालय सोनभद्र भेज दी गयी है। इस फैसले से जहां मृतक की पत्नी गीता यादव ने खुशी जाहिर की है वहीं डाक्टर के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के लिए शासन को पत्र भी लिखकर गीता यादव ने मांग की है।

 

Comments (1)Add Comment
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written by Prasant, March 20, 2013
I am going to share this news at facebook. Congratulation to you for creating awareness in society.

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