यह निर्भया नहीं, सोनभद्र की 11 साल की चमार बच्‍ची मौत की घडि़यां गिन रही है

: नवरात्रि के ठीक पहले सोनभद्र में हुआ हादसा, बुरी हालत में रांची एम्‍स में भर्ती है : अपराध सिर्फ यह कि गरीब है, बाप महुआ चुआता है :  बीमार मां को स्‍टेशन पर बिठा कर लौट रही थी बच्‍ची, दरिंदे ने मौत से बदतर बना दिया :

कुमार सौवीर/ मिथिलेश जायसवाल

सोनभद्र : दिल्‍ली से हजारों मील दूर जंगल में रहना और गरीब होना कितना भयावह होता है, उसका कितना दर्दनाक और भयावह नतीजा निकल सकता है, इसका अंदाजा यहां की एक मासूम बच्‍ची की हालत में देख कर लगाया जा सकता है। अपनी बीमार मां को ट्रेन बिठा कर अपने घर लौट रही इस बच्‍ची को एक दरिंदे ने अपनी हवस का शिकार बनाया और उसे अधमरा छोड़ कर भाग निकला। अब यह बच्‍ची रांची के एम्‍स में भर्ती है और जिन्‍दगी और मौत के बीच झूल रही है। कहने की जरूरत नहीं कि इस पूरे क्षेत्र में नवरात्रि में देवी उपासना की तैयारियां इस वक्‍त बेहिसाब और जोरशोर से चल रही हैं।

सबसे दुखद पक्ष तो यह है कि अगर ऐसा हादसा अगर दिल्‍ली में होता, तो अब पूरे देश में हंगामा खड़ा हो जाता। लेकिन चूंकि यह बच्‍ची एक निपट जंगल क्षेत्र की रहने वाली है, इसलिए कहां कोई भी सुगबुगाहट नहीं दिखायी पड़ रही है। आपको बता दें कि यह चमार जाति की है, और इस क्षेत्र में चार विधायक और एक सांसदों में से तीन लोग दलित जाति से हैं। लेकिन एक भी जन प्रतिनिधि ने इस मामले पर कोई भी संवेदनशीलता का प्रदर्शन नहीं किया। वह भी तब, जबकि यह बच्‍ची महज 11 बरस की है। यह हालत तब है जबकि इस पूरा क्षेत्र नवरात्रि की तैयारियों में देवी-उपासना में जुटा हुआ है। शर्मनाक बात तो यह है कि बच्‍ची

एक गढ़वा जिला अंतर्गत खरौंधी थाना क्षेत्र में दुष्कर्म की शिकार बच्ची तीन दिनों से  रांची के रिम्स में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रही है। रक्तस्त्राव नहीं रुक रहा है। दिन प्रतिदिन नाबालिग की हालत बिगड़ रही है। रिम्स के चौथी मंजिल पर स्थित लेबर रूम (प्रसूति गृह) में एडमिट इस बच्ची के इलाज में लापरवाही बरती जा रही है। हद तो यह है कि बच्ची के बेड पर एक और अन्य डिलेवरी पेसेंट को साथ में रखा गया है।  डॉक्टरों द्वारा इस बच्ची पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है

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सोनांचल

दरअसल इस बच्‍ची का परिवार बीहड़ गरीबी से जूझता है। बाप मजदूरी करता है, लेकिन जंगल में ज्‍यादा काम भी नहीं मिलता। ऐसे में यह परिवार अवैध महुआ शराब चुआता है। लेकिन इसके बावजूद मुश्किल से ही घर का चूल्हा जल पाता है। यहाँ तो गरीब वर्ग 11 वर्ष के बच्चों को लकड़ी लेने से लेकर मजदूरी करने तक भेज देते हैं। यहाँ के लिए ये कोई बड़ी बात नही है। बहरहाल, इस हादसे ने तो इस परिवार को पूरी तरह तोड़ दिया। अब हर पल अनहोनी की आशंका से ग्रसित नाबालिग के परिजन भगवान को याद कर संकट की घड़ी बीतने का इंतजार कर रहे हैं। नाबालिग की मां और मामा ने बताया कि गढ़वा से  चिकित्सकों ने तीन दिन पूर्व इस बच्ची को रिम्स रेफर तो कर दिया। मगर रिम्स में सही से इलाज नहीं हो पा रहा है।

माँ ने बताया कि वह अपनी बच्ची को साथ लेकर विण्‍ढम रेलवे स्‍टेशन पर ट्रेन पकड़ने गई थी। माँ को ट्रेन पर बैठा कर यह 11 वर्षीय बच्ची एक बस से घर वापस जा रही थी। दरअसल यह मां साइटिका से बुरी तरह ग्रसित है। उसे चुनार में किसी वैद्य से इलाज कराना था, जहां वह चार-पांच दिन चुनार में ही रहती। इसीलिए जरूरी सामान झोलों में रह कर चुनार जा रही थी। उसका सामान उठाने में मदद करने के लिए यह बच्‍ची भी विण्‍ढम चली आयी। उसे बस से अपने गांव किसुनपुरवा में उतरना था। लेकिन रास्‍ते में ही वह उसी नींद आ गयी, और वह सीधे कोन के बस अड्डे पर पहुंच गई।

वहीं एक व्यक्ति ने बच्ची को अपने विश्वास में लेकर उसे उसके गाँव छोड़ देने का वादा किया और उसके गांव न पहुंचाकर अपने साथ पड़ोसी राज्य झारखण्ड के खरौंधी क्षेत्र के जंगल में ले जाकर बलात्कार किया। और भाग गया।  बच्ची को जंगल में चरवाहों ने खून से लथपथ देखकर लोगों को बताया। पीड़िता के परिजनों ने बताया कि नगरउंटारी झारखण्ड (बंशीधर नगर) पुलिस ने बच्ची के परिजनों को बुलाकर रांची, रिम्स भेज कर अपनी खानापूर्ति कर दी है। गढ़वा (झारखण्ड) जिले पर लोगों ने खूब मदद किया था इस बच्ची के लिए लोगों ने रक्तदान भी किया और आर्थिक मदद भी दिया, लेकिन यहां पर (रिम्स राँची) कोई हमें मदद नहीं कर रहा है यूपी के होने के कारण हम लोगों पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है इस संबंध में संवाददाता ने झारखंड के भवनाथपुर विधानसभा के विधायक भानु प्रताप साही से बात की तो उन्होंने तत्काल मदद कराने का भरोसा दिलाया उन्होंने कहा कि हम अभी तुरंत ही रिम्स के डॉक्टर से बात करेंगे और इलाज में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं होने देंगे।

सोनभद्र के कोन थाना क्षेत्र  के 11 वर्षीय नाबालिग लड़की के साथ दुष्कर्म की घटना के चार दिन बाद भी सांसद विधायक या किसी पार्टी का कोई भी नेता घटना परघड़ियाली आंसू भी बहाने के लिए पीड़ित लड़की के घर नहीं पहुंचा और ना ही स्थानीय पुलिस भी इस और ध्यान दे रही है बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का नारा देने वाले राजनेता इतनी बड़ी घटना के बाद भी कोई सुध नहीं ले रहे हैं,सवाल यह उठता है कि दिल्ली मुंबई जैसे महानगरों में होने वाली घटनाओं पर दुख व्यक्त करने के लिए सोनभद्र में लोगों का लाइन लग जाता है लेकिन अपने यहां घटित इस  हृदय विदारक घटना पर दुख व्यक्त करने का भी समय किसी नेता को क्यों नहीं मिल रहा?

कोन थाना प्रभारी गोपालजी यादव के अनुसार घटना के सम्बंध में झारखण्ड के गढ़वा जिले के खरौंधी थाने में मुकदमा दर्ज हो गया है,झारखण्ड पुलिस ने जांच पड़ताल कर के कोन (यू पी) के कचनरवा निवासी मनोज भुइयां नामक युवक को नामजद किया है।उसे किसी भी तरह गिरफ्तार करने के लिए यूपी व झारखण्ड पुलिस संयुक्त रूप से प्रयास कर रही है।