3 दिन पहले पकड़ा, अब फिरौती मांग रहे एसटीएफ वाले

: जौनपुर के सीमान्‍त क्षेत्र में पकड़ा गया था एक स्‍थानीय चिरकुट दलाल : सवाल यह कि तीन दिन तक क्‍या पूछतांछ करते रहे पुलिसवाले : अब आसपास के गांवों से इस फिरौती के लिए हो रहा है दो लाख रूपयों का भिक्षाटन :

मेरी बिटिया संवाददाता

जौनपुर : एक अपराधी को पकड़ना। तीन दिनों तक उसे अपने कब्‍जे में रखना। और फिर उसे छोड़ने के लिए दो लाख रूपयों की फिरौती मांगना। अगर यह हरकत एसटीएफ की है, तो फिर उससे ज्‍यादा शर्मनाक और क्‍या हो सकता है।

यह मामला है जौनपुर का। यहां एक व्‍यक्ति को पुलिस के शिकंजे से छूटने के लिए उसके परिवारी जन दो लाख रूपयों की भारी-भरकम रकम जुटाने के लिए दर-ब-दर भटक रहे हैं। चूंकि यह व्‍यक्ति भी बेहद कुख्‍यात और चार सौ बीसिया है, इसलिए उसकी मदद करने के लिए कोई भी व्‍यक्ति इसके लिए मदद करने को सामने नहीं आ पा रहा है।

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जुल्‍फी प्रशासन

मामला है जौनपुर के खुटहन का। बताते हैं कि यहां कस्‍बे के पास के रहने वाले एक गांव के रहने वाले एक व्‍यक्ति का पूरा धंधा ही चार सौ बीसिया का है। पूरे क्षेत्र में वह कुख्‍यात है अपनी करतूतों से। भोले-भाले लोगों को किसी न किसी में फंसा कर उसे छुड़वाने के लिए रकम झटकना। सरकारी दफ्तरों में अफसरों से अपनी करीबी बता कर पैसा उगाहना। लोगों को लाइसेंस-परमिट दिलाने का दिलासा देना। अपनी पहुंच ऊंचे-ऊंचे लोगों तक दिखा कर बड़े खेल कर लेना इस शख्‍स के बायें हाथ का काम है।

बताते हैं कि इस व्‍यक्ति को पुलिस ने तीन दिन पहले दबोच लिया था। पता चला कि उसे पकड़ने वाले लोग एफटीएफ के हैं। तीन दिनों तक उससे पूछतांछ की गयी। लेकिन आज सुबह से ही पता चला कि उसे छोड़ने के लिए कोशिशें शुरू हो गयी हैं। इस व्‍यक्ति के परिजन अपने पड़ोसियों से पैसा मांग रहे हैं। उनका कहना है कि अगर दो लाख रूपयों का इंतजाम हो जाएगा तो एसटीएफ वाले उसे छोड़ देंगे। लेकिन चूंकि इस व्‍यक्ति की कुख्याति खासी हो चुकी है, इसलिए लोगबाग उसके लिए एक छदाम तक देने को तैयार नहीं हैं।

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लेकिन इससे अलग सवाल तो यह है कि आखिर तीन दिनों तक हिरासत में रखना, और उसके बाद दो लाख रूपयों जैसी बड़ी रकम की फिरौती उगाहना किस कानून में लिखा है। प्रमुख न्‍यूज पोर्टल मेरी बिटिया डॉट कॉम ने जब इस बारे में खुटहन थाना के अध्‍यक्ष से फोन करने की कोशिश की, तो उनका फोन ही नहीं उठा।

( खुटहन से एक नागरिक ने यह सूचना हमारे पोर्टल को इस आशय से भेजी है, कि उस अगर इस तरह की फिरौतियां मांगने की खबर उच्‍चाधिकारियों तक पहुंचा दी जाए)