सपाई बीन पर जोगी सरकार के खर्राटे: लोकसेवा आयोग

: पूरे यूपी में हंगामा, मगर सरकार और जनप्रतिनिधि अलमस्‍त : अकर्मण्‍य आयोग के सपाई अध्‍यक्ष पर कोई भी कार्रवाई नहीं : दो पीसीएस परीक्षाओं का परिणाम की चाभी त्रिवेणी में फेंकी : यूपी को अफसरों की आपूर्ति करने वाली फैक्‍ट्री ही नहीं, लाखों युवाओं का भविष्‍य भी धूमिल :

कुमार सौवीर

लखनऊ : इससे बेहतर तो अखिलेश यादव थे। अखिलेश ने अनिल यादव को भले ही रेवड़ी की तरह यूपी लोक सेवा आयोग के अध्‍यक्ष की कुर्सी थमा दी थी। लेकिन जैसे ही अदालत ने अनिल यादव पर कड़ी प्रतिक्रिया की, अखिलेश ने अदालत का सम्‍मान किया और बिना किसी चीं-चुपड़ के ही अनिल यादव को विदा कर दिया। भले ही अगला अध्‍यक्ष अनिरूद्ध यादव भी अखिलेश यादव का ही खासमखास निकला। लेकिन इसके बावजूद ताश की गड्डी फेंटने में जो साफगोई अखिलेश यादव ने दिखायी, वह बेमिसाल रही।

लेकिन अब हालत यह है कि आयोग की काहिली, नाकारापन के लिए जिम्‍मेदार अनिरूद्ध सिंह पर योगी सरकार चूं तक नहीं बोल पा रही है। पीसीएस की दो परीक्षाओं का परिणाम तक अनिरूद्ध सिंह नहीं घोषित कर पाये हैं, लेकिन आनन-फानन नयी परीक्षाओं की तारीख घोषित जरूर कर डाली। जाहिर है कि इससे सामान्‍य अ‍भ्‍यर्थियों का गुस्‍सा भड़क गया है। किसी भी सोशल साइट पर आप यूपी लोकसेवा आयोग की कार्यशैली पर तनिक भी कमेंट कर दीजिए, रोते-बिलखते युवक-युवतियां भरभरा कर वहीं पहुंच जाएंगे।

जरा उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के इतिहास की हालिया हरकतों पर नजर डालिये, तो आपको साफ पता चल जाएगा कि आयोग में कार्यशैली और व्‍यवस्‍था के नाम पर केवल भ्रष्‍टाचार और बेईमानी ही रची-बसी रही है। पद बेचे-खरीदे गये हैं, परीक्षा-घोटाले भरमार हैं। जिसकी भी क्षमता होती है, वह अपने-अपनों के बच्‍चों के लिए मनचाहा पद लेकर भाग निकल जाते हैं। मोटी रकम की जरूरत होती है, या फिर राजनीतिक पहुंच। अखिलेश सरकार ने तो यहां बेईमानी की एक गजब दूकान खुलवा दी थी।

अभ्‍यर्थियों के लिए जूझने के मुताबिक आप गौर कीजिए कि 29 मार्च 2015 पीसीएस 2015 प्रारंभिक परीक्षा का पेपर लीक होता है। छात्रों के उग्र आंदोलन के बाद प्रथम पाली का परीक्षा निरस्त किया गया और छात्रों के साथ गंदा मजाक किया गया। यह सिलसिला यहीं नहीं रुकता है। समीक्षा अधिकारी 2016 का पेपर भी लीक होता है जिसका जांच आज भी लंबित है और अभ्यर्थियों के अमूल्य समय को बर्बाद किया जा रहा है। यह सब एक सुनियोजित तरीके से होता रहा और भ्रष्टाचार का सिलसिला बढ़ता गया। हमारे नौजवानों के भविष्य के साथ खिलवाड़ होता रहा सरकारें चुप थी और नौजवान परेशान था।

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बदहाल है यूपी को अफसरों की आपूर्ति करने वाली फैक्‍ट्री

यहां लोकतंत्र में लोक खत्म हो गया था। और तंत्र ही बचा था। इसकाउदाहरण उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग में व्याप्त भ्रष्टाचार के विरुद्ध में उतरे लाखों प्रतियोगी छात्रों पर 48 बार लाठीचार्ज 7 बार फायरिंग वाटर कैनन,आंसू गैस के गोले छोड़े गए। प्रतियोगी छात्रों को जेल भेजा गया बात यहीं नहीं खत्म होती है। कई बार तो  छात्रों पर संगीन धाराएं लगाई गई। जैसे 7A /CLA गुंडा एक्ट। यहां तक कि कुछ छात्रों को 5000 का इनामी अपराधी तक घोषित कर दिया गया था। इस बात से उस समय में लोकतंत्र का अनुमान लगाया जा सकता है । लोक सेवा आयोग के भ्रष्टाचार को करीब से समझने और लिखने वाले इलाहाबाद के वरिष्ठ पत्रकार अखिलेश मिश्रा कहते हैं, आयोग में त्रिस्तरीय आरक्षण व्यवस्था जब लागू हुआ तो छात्रों ने इसके खिलाफ आंदोलन किया बाद में आयोग ने इसे बदला तो भ्रष्टाचार खुलकर सामने आया।

बहरहाल, अनिल यादव के बदले गये, और उनकी जगह अनिरूद्ध बैठे। उसके बाद निष्क्रियता की भयावह हालत पैदा हो गयी। हैरत की बात है कि योगी के मुख्‍यमंत्री बनने के सवा बरस बीत जाने के बाद भी सरकार ने इस आयोग पर कोई भी ध्‍यान नहीं दिया। एक बार भी सरकार ने यह नहीं सोचा कि यूपी को अफसरों की आपूर्ति करने वाली इस फैक्‍ट्री यानी यूपी लोक सेवा आयोग को चुस्‍त-दुरूस्‍त करना ही नहीं, बल्कि युवाओं में बढ़ती जा रही हताशा को दूर करने के लिए भी आयोग को सुधारना जरूरी है।

हालत यह है कि अपने भविष्‍य से भयभीत इन अभ्‍यर्थियों ने योगी सरकार पर ही लानत भेजना शुरू कर दिया है।