अभ्‍यर्थी कुढ़न में, अफसर बदला लेने और सरकार मौज में

: जब जब पांव पड़े हैं संतन के, तब तब हुआ है बंटाधार : सीबीआई जांच से क्षुब्ध लोक सेवा आयोग का अध्यक्ष छात्रों से बदला लेने पर आमादा : गलत प्रश्‍न-उत्‍तर तैयार करने वाले विशेषज्ञों पर कोई भी कार्रवाई नहीं, थोप दी परीक्षाएं :

अवनीश पाण्‍डेय

इलाहाबाद : लोक सेवा आयोग के पूर्व तथा वर्तमान अध्यक्ष सीबीआई जांच के दायरे में हैं। परीक्षा समिति के अध्यक्ष तथा सदस्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष तथा सदस्य ही होते हैं, जब प्रतियोगी छात्रों को लोक सेवा आयोग की शुचिता तथा निष्ठा पर से विश्वास ही समाप्त हो गया है। तथा इस तथ्य से अवगत होकर ही राज्य सरकार सीबीआई जांच करा रही है फिर इनके रहते शुचिता पूर्ण परीक्षा कैसे संभव है।

लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित पीसीएस 2016 की मुख्य परीक्षा सितम्बर 2016 में हुई थी। जिसका परिणाम अभी तक नहीं आया है। हालत यह है कि इस परीक्षा में गलत प्रश्नों तथा गलत उत्तर को खासा विवाद खड़ा हो चुका है। परीक्षार्थी बेहाल हैं, और दौड़-भाग में जुटे हैं ताकि कोई रास्‍ता निकल पाये, सरकार और आयोग के कानों पर जूं रेंग सके। लेकिन सरकार को अपनी राजनीतिक शतरंत की गोटियों को बिछाने और हटाने से ही फुरसत नहीं है। मजा ले रहा है लोक सेवा आयोग, ताकि जितना भी हो सके, मामले को और भी ज्‍यादा लटकाया जा सके। उसका मकसद इस परीक्षा के विवाद का निस्तारण करने नहीं, बल्कि उसे लम्बित रखना ही है।

यदि PCS 2016 के परिणाम आने के बाद PCS 2017 की परीक्षा होती हो उन बेरोजगार युवकों को नौकरी का अवसर प्राप्त होता जो अभी तक बेरोजगार हैं । दोनों मुख्य परीक्षा में हजार से अधिक कामन छात्र हैं और नौकरी में हैं । लोक सेवा आयोग प्रत्येक PCS की प्रारम्भिक परीक्षा में 10 से 12 गलत प्रश्न रखता रहा है इस बार भी यही किया है । मामला कोर्ट में गया है, कोर्ट को भी यह समझने की आवश्यकता है कि प्रदेश की सबसे प्रतिष्ठित संस्था से बार बार यह लगती क्यों हो रही है ? सही तो यह है कि न्यायालय को आयोग के प्रश्न बनाने वाले तथा उत्तर बनाने वाले एक्सपर्ट के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही करनी चाहिए ताकि इसकी पुनरावृत्ति न हो ।

गड़बडि़यां तब से शुरू होने लगीं, जब से लोक सेवा आयोग में अनिल यादव का अध्यक्ष पद पर पदार्पण हुआ। उनकी करतूतों के चलते ही प्रतियोगी छात्रों को एक महीने का भी समय मुख्य परीक्षा हेतु नही मिला, और हालत आज भी सुधरने के बजाय लगातार बदतर ही होती जा रही है। मुख्य परीक्षा में 2 विषय के चार पेपर, सामान्य अध्ययन के दो पेपर, सामान्य हिंदी तथा निबन्ध के पेपर होते हैं, आखिर 20 दिन में छात्र कैसे कर सकता है तैयारी। सरकार बदलने के बाद यह उम्मीद जगी थी न्याय मिलेगा किन्तु आयोग की मनमानी आज भी उसी तरह जारी है जैसे पूर्व सरकार में जारी थी ।

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बदहाल है यूपी को अफसरों की आपूर्ति करने वाली फैक्‍ट्री

एक प्रकार से लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष तथा सदस्य छात्रों से सीबीआई जाँच का बदला ले रहे हैं तथा सरकार बेबस दिख रही है।

सरकार से अनुरोध है कि पहले भष्ट अध्यक्ष/सदस्यों को उनके पद से हटाए, उसके बाद ही कोई परीक्षा सम्पन्न कराए । यह सम्भव है कि सरकार जल्दी भर्ती चाहती हो तो इसका विकल्प है कि 2 वर्ष के लिए लोक सेवा आयोग उत्तर प्रदेश की सभी परिक्षाओं को सम्पन्न कराने की जिम्मेदारी संघ लोक सेवा आयोग को सौंप दें । संविधान में यह प्रावधान है कि केंद्र सरकार तथा राज्य सरकार की संस्तुति पर किसी भी लोक सेवा आयोग की भर्ती संघ लोक सेवा आयोग को दी जा सकती है ।

यह माँग उन छात्रों की है जिन्होंने पूर्ववर्ती सरकार के विरुद्ध आवाज उठाई, 48 बार लाठी खाये, 3 बार गोली चली, सैकड़ो छात्र जेल गए यहां तक कि छात्रों को 5 हजार का इनामी अपराधी तक घोषित किया गया। सरकार बदले इस उम्मीद से की वर्तमान सरकार में उनके जायज मांग को सुना जाएगा लेकिन 2 लाख ट्वीट लाखों मेल के बाद भी सरकार के कोई निर्णय न लेने पर छात्रों में वर्तमान सरकार के प्रति भी आक्रोश व्याप्त हो रहा है।